बुधवार, 27 मई 2026

दोहे 026 : सामान्य दोहे

 दोहे 026 : सामान्य दोहे

:1:

प्रेम रतन अनमोल है, यह दैविक उपहार ।

जो नर इसको पा लिया , तुच्छ लगे संसार ॥

मंगलवार, 26 मई 2026

दोहे 25 : सामान्य दोहे

दोहे: क़िस्त 025

:1:
हार कभी ना मानना, ना करना विश्राम ।
कष्ट मिटे, बंधन कटे, बोलो "जय श्री राम" ॥

:2:
मंदिर मसजिद बाद मे, पहले मन की मान ।
मन के अंदर झाँक तो, खुद को तू पहचान ॥

:3:
मिल जाएँगी मंजिले, मन मे हो गर चाह ।
दुखी विकल मत हो सखे!, जीने की सौ राह ॥

:5:
कह 'आनन' क्यो कर रहा, आदर्शों की बात ।
सभी यहाँ तैयार हैं , करने को आघात ॥

:6:
कथनी करनी में दिखे, तुम्हे कभी जो फ़र्क ।
नहीं  भरोसेमंद  वह ,जो  भी देवे  तर्क ॥

:7:
ऊपर से वह दिखा रहा , भले मधुर मुसकान ।
लेकिन भीतर हँस रहा , एक कुटिल  शैतान  ॥

-आनन्द.पाठक ’आनन’

880092 7181

सोमवार, 25 मई 2026

दोहा 24: सामान्य दोहे

:1:
अगर प्रेम से बोलिए, मैं जाऊँगा हार ।
ऐसे लोगों का करूँ, हाथ जोड़ सत्कार ।।

:2:
प्रवचन तो तू कर रहा , मगर कहीं है ध्यान ।
 पहले मन तो साफ कर, तब देना फिर ज्ञान ।।

:3:
पता नहीं उसको अभी, क्या होता है प्यार ।
पन्ने चार किताब के, पलटे बारम्बार ॥

:4:
दुनिया का तो काम है, सदा फेंकना जाल ।
बचना है बंदे तुझे , ख़ुद को ज़रा सँभाल  ॥

:5:
कभी कभी तो सुन ज़रा. औरों की भी बात ।
अपना ही सच मान कर, गाता है दिन रात ॥

:6:
बरसाने की राधिका, गोकुल के श्री श्याम ।
हरित कदम की छाँव में, युगल दॄश्य अभिराम ॥

:7:
सच्चा साधु है वही, मन में रखे न द्वेष ।
वरना तो मिलते छली , बदल बदल कर भेष।।

-आनन्द पाठक ’आनन’-
880092 7181