:1:
अगर प्रेम से बोलिए, मैं जाऊँगा हार ।
ऐसे लोगों का करूँ, हाथ जोड़ सत्कार ।।
:2:
प्रवचन तो तू कर रहा , मगर कहीं है ध्यान ।
पहले मन तो साफ कर, तब देना फिर ज्ञान ।।
:3:
पता नहीं उसको अभी, क्या होता है प्यार ।
पन्ने चार किताब के, पलटे बारम्बार ॥
:4:
दुनिया का तो काम है, सदा फेंकना जाल ।
बचना है बंदे तुझे , ख़ुद को ज़रा सँभाल ॥
:5:
कभी कभी तो सुन ज़रा. औरों की भी बात ।
अपना ही सच मान कर, गाता है दिन रात ॥
:6:
बरसाने की राधिका, गोकुल के श्री श्याम ।
हरित कदम की छाँव में, युगल दॄश्य अभिराम ॥
:7:
सच्चा साधु है वही, मन में रखे न द्वेष ।
वरना तो मिलते छली , बदल बदल कर भेष।।
-आनन्द पाठक ’आनन’-
880092 7181